Friday, January 22, 2010
चेहरा
इस भीड़ में गुम दिखाई देता है एक चेहरा
भीड़ में गुम कई चेहरे किसी अमीर का चेहरा तो किसी गरीब का चेहरा
बर्फीली सर्दी में ठिठुरता हुआ एक असहाय का चेहरा
बसेरे की चाह में एक लाचार का चेहरा
रोज़ी की तलाश में रिकशा खीचते एक गरीब का चेहरा
अशान्त मन से भी झूठी हंसी का आवरण ओढे॰ एक अमीर का चेहरा
इन विभिन्न चेहरों से भिन्न एक चेहरा
अपने ही चेहरे की पहचान में लीन एक चेहरा
प्रचंड धुंध में भी राह तलाशता एक चेहरा
अपने क्षींण होते विश्वास को बल देता एक चेहरा
अपने अस्तित्व को सहेजता एक चेहरा
पथरीली राहों में गिरकर फिर संभलता हुआ चेहरा
न तो किसी अमीर का न ही किसी गरीब का
भीड़ के बीच में भी भीड़ से अलग एक चेहरा
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